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Ayurveda prayojan : आयुर्वेद का प्रयोजन क्या है?

Ayurveda Prayojana

आयुर्वेद लगभग 5000 वर्ष पुरानी भारत की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है| आयुर्वेद प्रयोजन का मतलब है कि आयुर्वेद का उद्देश्य क्या है|  इसका उद्देश्य निम्न श्लोक में निहित है|

Ayurveda, an ancient system of medicine that originated in India over 5,000 years ago. Ayurveda Prayojana means the aim and objective of Ayurveda

“ स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षण"

स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य का रक्षण करना

To Protect the health of a healthy person

“आतुरस्या व्याधि परीमोक्ष”

बीमार व्यक्ति के व्याधि (रोगों) का नाश करना आयुर्वेद का प्रयोजन होता है।

To eliminate the diseases of a sick person is the objective of Ayurveda i.e. Ayurveda Prayojan

आयुर्वेद शास्त्र बनाने या बनने का कारण ही स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और बीमार व्यक्ति को व्यधिमुक्त ( रोगमुक्त ) करना है। इसलिए आयुर्वेद को व्यवहारिक रूप देने के लिए कई भागो या अंगो में विभाजित किया गया है जिससे सम्पूर्ण शरीर का यथावत अध्ययन परीक्षण कर समुचित रोगों की चिकित्सा की जा सके एवं सभी के लिए सुलभ हो सके| आयुर्वेद को आठ अंगो में बांटा गया है|

The reason for creating Ayurveda Shastra is to protect the health of a healthy person and to make the sick person free from diseases. Therefore, to give a practical form to Ayurveda, it has been divided into many parts so that the entire body can be studied and tested properly and appropriate diseases can be treated and accessible to everyone. Ayurveda is divided into eight parts

1. कायचिकित्सा (Internal medicine)

2. कौमारभृत्य या बाल चिकित्सा ( Pediatrics treatment)

3. गृह चिकित्सा या भूत विद्या ( मनोविकार चिकित्सा psychiatry treatment)

4. शालाक्य तंत्र या उर्धयंग चिकित्सा (आंख,कान,नाक,गलाआदि की चिकित्सा ENT & Ophthalmology)

5. शल्य तंत्र (Surgery)

6. अगद तंत्र (Toxicology)

7. रसायन तंत्र (Treatment for Rejuvenation)

8. वाजीकरण तंत्र (Treatment for Infertility and Virility)

आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति की परिभाषा क्या है?

आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति की परिभाषा निम्न श्लोक द्वारा बताई गई है|

समदोषः समाग्निश्च समधातु मलःक्रियाः।

प्रसन्नात्मेन्द्रियमनः स्वस्थइतिअभिधीयते॥

कोई व्यक्ति जिसके

1) दोष (humour),

2) अग्नि (digestive fire),

3) धातु (tissues),

सम (balance) में हैं, और

4) मलःक्रिया (Physiological functions of excretions, etc.) भी सही है| इसके साथ जिसकी आत्मा, इन्द्रिया और मन प्रसन्न हैं उसे स्वस्थ कहते हैं|

One has humour, digestive fire, and tissues in balance condition and his Physiological functions of excretions, etc. are in order as well as his Soul, Senses and Mind are happy is considered as healthy person.

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